पटना : एक किँवदँतियो का शहर है ।इसका अतीत गौरवशाली रहा है इसके ढाई हजार वर्षो के इतिहास मेँ काफी नाम परिवर्तित हुए ,यह कभी कुसुमपुर के नाम से विख्यात था तो कभी पुष्पपुर से , कालाँतर मेँ अजीमाबाद नाम से प्रसिद्ध हुआ तो कभी ज्ञात हुआ कि यह प्राचीन पाटलिपुत्र के ध्वंसावशेष पर निर्मित है ।
यह अनेको किँवदँतियो से जुडा हुआ है ।
"अगम कुआँ" जहाँ महान सम्राट "अशोक" से जुडा हुआ है, वहीँ "कुम्हरार" मौर्यकालीन इतिहास का जीवँत उदाहरण है । दसवेँ गुरु गोविन्द सिँह का जन्मस्थान "तख्त हरमँदिरजी" है जिनका निर्माण महाराजा रणजीत सिँह ने करवाया था । "शहीद स्मारक" पुराने सचिवालय के पूर्व मेँ है जहाँ 11अगस्त 1942 को भारत छोडो आँदोलन मेँ सचिवालय पर तिरँगा फहराने के लिए देशभक्तो ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे । कुल मिलाकर प्राचीन पाटलिपुत्र अब नए पटना के रुप मेँ भारत का प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है । इसका अतीत जितना गौरवशाली था,वर्तमान जितना सुदृढ है, भविष्य उतना ही उज्ज्वल रहेगा । माधव कुमार
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